पैगंबर मुहम्मद साहब (PBUH): एक नज़र में

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम):

 एक नज़र में

पैगंबर मुहम्मद साहब (PBUH): एक नज़र में prophet Muhammad sahab ki jivni hindi mein hazrat mohammad sahab ki zindagi

पितृ पक्ष (पिता की ओर से) वंश:

मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल मुत्तलिब बिन हाशिम बिन अब्द मनाफ बिन क़ुसै बिन किलाब बिन मुर्रा बिन क़अब बिन लुवै बिन ग़ालिब बिन फ़िह्र बिन मालिक बिन नज़्र बिन किनाना बिन ख़ुज़ैमा बिन मुद्रिका बिन इलयास बिन मुज़र बिन निज़ार बिन मअद्द बिन अदनान।

यह वंश सर्वसम्मति से प्रमाणित है। इसके ऊपर (अदनान से ऊपर आदम अलैहिस्सलाम तक) के वंश में गहरे मतभेद हैं।

मातृ पक्ष (माँ की ओर से) वंश:

मुहम्मद बिन आमिना बिनत वहब बिन अब्द मनाफ बिन ज़ुहरा बिन किलाब बिन मुर्रा (छठी पीढ़ी किलाब पर आपका पितृ और मातृ वंश मिल जाता है)।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का जन्म:

बनी हाशिम की घाटी (शेअबे बनी हाशिम) में सोमवार की सुबह, 9 रबीउल अव्वल, हाथी वालों के विनाश के वर्ष (आमुल फ़ील), 20 अप्रैल 571 ईस्वी को। (कुछ रिवायतों में 12 रबीउल अव्वल का भी कहा गया है)।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जन्म से जुड़ी बरकतें (चमत्कार):

जन्म की रात, फारस के बादशाह किसरा के महल में भूकंप आया और उसके 14 गुम्बद गिर गए। एक हज़ार साल से लगातार जल रही आग (जिसकी वे पूजा करते थे) अपने आप बुझ गई।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को  दूध पिलाने वाली माताएँ:

1. अबू ज़ुवैब की बेटी हलीमा सअदिया।

2. अबू लहब की दासी सुवैबा।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पालन-पोषण करने वाली:

उम्मे अयमन हबशिया (जिनका नाम बरकह था)। आपके पिता अब्दुल्लाह ने इन्हें विरासत में छोड़ा था। बड़े होकर आपने बरकह को आज़ाद कर दिया और उनका निकाह ज़ैद बिन हारिसा से करा दिया।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का अनाथपन:

आप माँ के पेट में ही थे जब पिता अब्दुल्लाह का इंतक़ाल हो गया। छह साल की उम्र में माँ आमिना का भी इंतक़ाल हो गया। फिर दादा अब्दुल मुत्तलिब की क़फ़ालत में गए। जब आठ साल दो महीने दस दिन के हुए तो दादा का भी इंतक़ाल हो गया। फिर चाचा अबू तालिब ने आपकी क़फ़ालत की।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पहला विवाह:

पच्चीस साल दो महीने दस दिन की उम्र में खदीजा बिनत खुवैलिद से निकाह फ़रमाया। खदीजा की उम्र 40 साल थी।

– अबू तालिब ने निकाह का ख़ुत्बा पढ़ा।

– वरक़ह बिन नौफ़ल (खदीजा के चचेरे भाई) ने इजाब किया।

– अबू तालिब ने अपने माल से 20 ऊँट महर तय किया।

काबा के पुनर्निर्माण में हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का हिस्सा:

35 साल की उम्र में काबा के पुनर्निर्माण में कुरैश के साथ शामिल हुए और अपने पवित्र हाथ से हजर-ए-असवद को उसकी जगह रखा।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को नुबुववत (पैग़म्बरी) का प्राप्त होना:

चालीस साल की उम्र में, 8 रबीउल अव्वल, सोमवार के दिन, ग़ार-ए-हिरा में जिब्रईल वही लेकर आए और अल्लाह ने आपको नबूवत अता की। सूरह अल-अलक़ की पहली पाँच आयतें नाज़िल हुईं।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए ग़म का वर्ष (आमुल हुज़्न):

नबूवत के दसवें वर्ष अबू तालिब का इंतक़ाल हुआ और उसके तीन दिन बाद खदीजा का भी इंतक़ाल हुआ। इसलिए इस वर्ष को “ग़म का वर्ष” कहा जाता है।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का सफ़र मेराज(आसमानों का सफ़र ):

51 साल 9 महीने की उम्र में, अल्लाह ने आपको मेराज अता की। सबसे पहले जमजम और मक़ाम-ए-इब्राहीम के बीच से फ़रिश्तों ने आपको बैतुल मुक़द्दस ले जाया, फिर वहाँ बुराक़ पेश किया गया। आप बुराक़ पर सवार होकर सातों आसमान तक पहुँचाए गए और वहीं पर पाँचों वक़्त की नमाज़ें फ़र्ज़ हुईं।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हिजरत (प्रवास):

53 साल की उम्र में, आपको मक्का छोड़ने का हुक्म हुआ। 8 रबीउल अव्वल, 16 सितम्बर 622 ईस्वी को मक्का से मदीना के लिए रवाना हुए।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का मदीना में निवास:

सोमवार के दिन मदीना दाख़िल हुए और वहाँ दस साल तक क़याम फ़रमाकर इंतक़ाल फ़रमाया।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इंतक़ाल:

63 साल की उम्र में, सोमवार के दिन, 12 रबीउल अव्वल, दोपहर के वक़्त इंतक़ाल फ़रमाया। चौदह दिन बीमार रहे। बुधवार की रात को दफ़्न हुए। खिलाफ़त के मामलों को तय करने और सहाबा की आपकी वफ़ात पर अवर्णनीय व्याकुलता की वजह से दफ़्न में कुछ देर हुई।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को ग़ुस्ल देने वाले:

हज़रत अली, हज़रत अब्बास, फ़ज़्ल बिन अब्बास, क़ुस्म बिन अब्बास, आपका ग़ुलाम शुक़रान, उसामा और औस बिन ख़ौला शामिल रहे।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कफ़न:

यमन के गाँव सुहूल के बने तीन कपड़ों में कफ़न दिया गया—जिसमें दो चादरें और एक कुर्ता था (इब्ने अब्बास)।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का जनाज़ा:

आपकी जनाज़ा की नमाज़ सबने अलग-अलग पढ़ी। नमाज़ में सिर्फ़ दरूद व सलाम के कलिमात पढ़े गए।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की कब्र:

आपकी लाल धारीदार चादर, जिसे आप ज़िंदगी में ओढ़ते थे, बिछाई गई। बग़ली कब्र खोदी गई और 9 कच्ची ईंटें लगाई गईं। हुजरे-आइशा में दफ़्न हुए।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पत्नियाँ:

1. खदीजा बिनत खुवैलिद

2. सौदा बिनत ज़मआ

3. आइशा बिनत अबी बक्र

4. हफ़्सा बिनत उमर बिन ख़त्ताब

5. ज़ैनब बिनत ख़ुज़ैमा

6. उम्मे सलमा हिंद बिनत अबी उमैय्या

7. ज़ैनब बिनत जह्श

8. जुवैरिया बिनत हारिस

9. उम्मे हबीबा रमला बिनत अबी सुफ़ियान

10. सफ़िय्या बिनत हुयै बिन अख़्तब

11. मैमूना बिनत हारिस

इनमें से खदीजा और ज़ैनब बिनत ख़ुज़ैमा आपकी ज़िंदगी में ही इंतक़ाल कर गईं। बाक़ी 9 पत्नियाँ आपके इंतक़ाल के वक़्त मौजूद थीं।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की संतान:

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बेटे:

1. क़ासिम

2. अब्दुल्लाह (तैय्यब, ताहिर)

3. इब्राहीम (मारिया क़िब्तिया से)

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बेटियाँ:

1. ज़ैनब

2. रुक़ैय्या

3. उम्मे कुल्सूम

4. फ़ातिमा

सारे बेटे बचपन में ही इंतक़ाल कर गए। बेटियों ने इस्लाम का ज़माना पाया, हिजरत की, लेकिन आपकी ज़िंदगी में ही सबकी वफ़ात हो गई, सिर्फ़ हज़रत फ़ातिमा ज़िंदा रहीं। उनकी वफ़ात आपके इंतक़ाल के छह महीने बाद हुई। आपकी संतान सिर्फ़ हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा से आगे बढ़ी।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के चाचा और फूफियाँ:

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)के चाचा (10):

1. हारिस

2. ज़ुबैर

3. अबू तालिब

4. हम्ज़ा

5. अबू लहब

6. ग़ैदाक़

7. मुक़व्विम

8. ज़रार

9. अब्बास

10. क़ुस्म

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की फूफियाँ (6):

1. उम्मे हकीम बैज़ा

2. बर्रह

3. आतिका

4. सफ़िय्या

5. अरवा

6. उमैमा

इनमें से हम्ज़ा, अब्बास और सफ़िय्या ने इस्लाम क़ुबूल किया।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ग़ुलाम (लगभग 23):

ज़ैद बिन हारिसा, उसामा, सुवैबान, अबू कबशा, अनीसा, शुक़रान, रबाह, यसार, अबू राफ़े, अबू मुवैहिबा, कज़ाला, राफ़े, मदअम, करकरह, ज़ैद (हिलाल बिन यसार के दादा), उबैद, तुहमान, माबूर क़िब्ती, वाकिद, हिशाम, अबू ज़मीर, अबू असीब, अबू उबैद, अबू सुफ़ैना, अबू हिंद, अनजशा, अबू उमामा।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दासियाँ (लगभग 12):

सलमा, उम्मे राफ़े, रदवी, उमैमा, उम्मे ज़मीर, मारिया, शीरीन, उम्मे अयमन, रैहाना, मैमूना, ख़ज़रा, हवैला।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ख़ादिम (निजी सेवक, लगभग 11):

अनस बिन मालिक, हिंद, अस्मा (हारिसा की बेटियाँ), रबीआ बिन क़अब, अब्दुल्लाह बिन मसऊद, उक़बा बिन आमिर, बिलाल, सअद, ज़ुल मखमर, बकीर बिन शुद्दाख़, अबू ज़र ग़िफ़ारी।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के चौकीदार/संतरी (लगभग 9):

सअद बिन मुआज़, ज़कवान, मुहम्मद बिन मुस्लिमा, ज़ुबैर, उबादा बिन बशीर, सअद बिन अबी वक़्क़ास, अबू अयूब, बिलाल।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए वही लिखने वाले (कातिबे वही, लगभग 14):

अबू बक्र, उमर, उस्मान, अली, आमिर बिन फ़ुहैरा, अब्दुल्लाह बिन अरक़म, उबै बिन क़अब, साबित बिन क़ैस, खालिद बिन सईद, हन्ज़ला बिन रबी, ज़ैद बिन साबित, मुआविया, शरहबील बिन हसना।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नुज्बा (विशिष्ट सहाबा, लगभग 13):

खुलफ़ा-ए-राशिदीन (चारों खलीफ़ा), हम्ज़ा, जाफ़र, अबू ज़र, मिक़दाद, सलमान, हुज़ैफ़ा, अब्दुल्लाह बिन मसऊद, अम्मार, बिलाल।

अशरा मुबश्शरा (जिन्हें जन्नत की शुभ सूचना दी गई, 10):

4 खुलफ़ा-ए-राशिदीन (चारों), सअद बिन अबी वक़्क़ास, ज़ुबैर बिन अव्वाम, अब्दुर्रहमान बिन औफ़, तल्हा बिन उबैदुल्लाह, अबू उबैदा बिन जर्राह, सईद बिन ज़ैद।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ग़ज़वात और सराया:

कुल 27 ग़ज़वात (जिनमें आप शामिल हुए) हुए। उनमें से सिर्फ 7 या 10 में युद्ध हुआ: बद्र, उहुद, ख़ंदक़, बनू क़ुरैज़ा, बनू मुस्तलिक, ख़ैबर, ताइफ़।

(एक रिवायत के मुताबिक वादी-अल-क़ुरा, ग़ाबा और बनू नज़ीर में भी युद्ध हुआ)।

सराया (वे अभियान जिनमें आप स्वयं नहीं गए) लगभग 50 के क़रीब हैं।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के हज और उमरा:

दो हज नफ़्ल किए। हज की फ़र्ज़ियत के बाद सिर्फ़ एक हज फ़रमाया (हज्जतुल विदा)।

कुल चार उमरे अदा किए।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के घोड़े:

दस घोड़े थे (संख्या में मतभेद है)।

सकब, मुरतजिज़, लज़्ज़ाज़, लहीफ़, ज़रब, वर्द, ज़रीस, मलवाह, सबहा, बह्र।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के खच्चर:

तीन खच्चर थे।

दुलदुल (मुक़ौकिस ने भेंट किया), फ़ज़्ज़ा (अबू बक्र ने भेंट किया), इलिया (इलिया के बादशाह ने भेंट किया)।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के गाय-भैंस:

गाय या भैंस का होना साबित नहीं है। हाँ, 20 दूध वाली ऊँटनियाँ थीं, जो मदीना के पास “ग़ाबा” नामी जगह पर रहती थीं।

एक ऊँटनी “क़सवा” नाम की थी, जिस पर हिजरत की थी और जो वही उतरने के वक़्त आपका बोझ उठा सकती थी।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बकरियाँ:

एक सौ बकरियाँ थीं। एक ख़ास बकरी दूध पीने के लिए थी।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का मुर्गा:

एक सफ़ेद मुर्गा था जो सुबह आज़ान देता था।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तलवारें:

9 तलवारें थीं।

ज़ुलफ़िक़ार, क़लऊई, बतार, हत्फ़, मख़ज़म, रसूब, अज़ब, क़ज़ीब, मासूर।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के भाले:

चार भाले थे।

एक का नाम मुसन्ना था। एक निम भाला था जो ईद के मैदान में आपके सामने उठाया जाता था। एक टेढ़े सिर वाला छोटा भाला और एक लम्बे डंडे वाला भाला।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की लाठियाँ:

दो लाठियाँ थीं।

एक छोटी लकड़ी थी जिसका नाम अर्जुन था। एक पतली लाठी थी जिसका नाम ममशूक़ था।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के धनुष और तरकश:

4 धनुष, एक तरकश और एक ढाल थी।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ज़िरह (बख़्तर):

तीन ज़िरह थे।

सअदिया, फ़स्सा, जातुल फ़ुज़ूल। (ज़िरह दाऊदी का भी कहा जाता है, जो हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम ने जालूत को मारने के दिन पहनी थी)।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सिर का लोहे का टोप (ख़ुद):

जातुस सुबूग़ नामक एक ख़ुद था।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का कमरबन्द:

कमर में बाँधने के लिए एक चमड़े का पट्टा था।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कपड़े और अंगूठी:

एक यमनी लुंगी, दो सहारी जोड़े, दो कुर्ते (एक सुहूली, एक सहारी), एक यमनी चोगा (जुब्बा), एक नक़्शीदार चादर (ख़मीसा), चार टोपियाँ, दो यमनी चादरें (हिबरा), एक सफ़ेद और एक काली चादर, एक लिहाफ़।

एक चाँदी की अंगूठी थी जिस पर “मुहम्मद रसूलुल्लाह” खुदा हुआ था, इसका नग भी चाँदी का था। दो जोड़ी सादे मोज़े थे जो नजाशी ने भेंट किए थे। एक काला पगड़ी थी जिसे फ़त्ह-ए-मक्का के दिन बाँध कर तशरीफ़ लाए थे। वुज़ू के बाद मुबारक चेहरा पोंछने के लिए एक रूमाल था।

छोटे-बड़े चार कटोरे थे। दो छोटे-बड़े बर्तन थे। एक मद्द या साअ (माप) था। जुमे के लिए दो जोड़े ख़ास थे।

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का सौन्दर्य (हुलिया शरीफ़):

आपका क़द मध्यम था। रंग सफ़ेद में लाली लिए हुए था। सीना चौड़ा था। बाल कान के लो तक पहुँचते थे। सिर और दाढ़ी मिलाकर लगभग 20 बाल सफ़ेद थे। चौदहवीं के चाँद की तरह चेहरा चमकता था। शरीर सुडौल था। काली पुतली वाली बड़ी-बड़ी आँखें थीं। जब ख़ामोश रहते तो हिब्बत और बुज़ुर्गी झलकती, और जब बात करते तो लुत्फ़ और नज़ाकत झलकती। दूर से देखने वाला आपकी खूबसूरती और नज़ाकत को महसूस करता, और पास से देखने वाला मलाहत और शीरीनी पाता। आपकी बातें मीठी थीं। माथा चौड़ा, भौंहें पतली और लम्बी थीं, आपस में जुड़ी हुई नहीं थीं। नाक लम्बी थी। गाल नरम थे। मुँह खुला हुआ था। दाँतों के बीच फ़ासला और चमक थी। दोनों कंधों के बीच मुहर-ए-नबूवत थी। सीने से नाभि तक बालों की एक लम्बी लकीर थी। शरीर पर अधिक बाल नहीं थे। दोनों हथेलियाँ और पैर नरम थे। आपके वर्णन करने वाले कहते थे: “मैंने आपसे सुन्दर न आपसे पहले कभी देखा और न आपके बाद। आपसे सुन्दर कोई औरत ने जना ही नहीं। आप हर ऐब से पाक पैदा किए गए, मानो आपको वैसे ही बनाया गया जैसा आप चाहते थे।”

नोट: सीरत (पैग़म्बर साहब की जीवनी) की जो रिवायत (वर्णन) लेखक की नज़र में सबसे मज़बूत (राजिह) थी, उसी को आधार बनाया गया है। ख़ास तौर पर ‘मसनद-उल-हिन्द’ शाह वली उल्लाह दहलवी  की किताब “सुरूर-उल-महज़ून'” को।

اردو مضمون یہاں پڑھیں

शकील मंसूर अल कासमी

हिंदी अनुवाद:

मुहम्मद तौसीफ कासमी

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